१९४७ मे अग्रेजो ने भारत क्षोड्ने से पहले अपना आखिरि दाव खेला, कूटनीतिक वार करके भारत के दो टुकडे कर दिया, भारत के मुसलमान अपने लिए अलग देश चाहते थे सो भारत का कुक्ष हिस्सा अलग कर बना दिया गया पाकिस्तान बट्वारा हो गया ओर दोनो देश एक दुसरे के दुस्मन बन गये हमेसा के लिए ऍ बात हम आप ओर दुनिया जानति हे, मुसलमन उस हिस्से पर पाकिस्तान बनाये जहा उनकि आवादी ज्यादा थि, ओर उस हिस्से से हिन्दुओ को खत्म कर दिये, लेकिन काश्मीर एक ऍसा हिस्सा था जहा हिन्दू ओर मुसलमन दोनो कि आवादी लगभग बराबर थि, तथा भारत भि काश्मीर को क्षोड्ना नहि चाहता था, लाख जोर लगा कर भि पाकिस्तान ओर मुसल्मान काश्मीर से हिन्दुओ को पुरी तरह से खत्म नहि कर पाए, सो दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान काश्मीर का नाम लेकर, आजादी, जेहाद्, ओर आतन्क्वाद के नाम पर बासठ सालो से घोसित तथा अघोसित युद्ध लड रहा हे, आखिर क्यु ? भारत ने क्या बिगाडा हे पाकिस्तान का ? भारत ने कोन सि भूल कि हे ? ओर पाकिस्तान क्या चाहता हे भारत से ?
उपरोक्त सारे सवालो का जबाब भारत का हर नागरिक जानता हे, १० साल से उपर के बच्चे से मरणासन्न बुढे तक, किसानो से सेना के जवानो तक, मजदूरो से ब्यापारियो तक, अभिनेताओ से नेताओ तक, गवारो से बुद्धजीवियो तक, कोइ भि इसका कारण बता देगा, साथ मे समाधान भि बता देगा, मेरा दावा हे लोकतन्त्र के चारो स्तम्भो से खाश कर नेताओ ओर सूचना तन्त्रो से सिर्फ सच बोले ओर सच का साथ दे तो सभि सम्स्याए ख्त्म हो जायेगि, क्यो कि देश ओर देश के आम आदमी तथा उसकि सम्स्याओ से युद्ध के बीच लोकतन्त्र के चारो स्तम्भ शिखन्डी कि भुमिका मे खडा हे.
Friday, 19 December 2008
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