भारतीय नेताओ कि सम्बेदन हीनता का ऊदाहरण कल भारतीय सन्सद के अन्दर आतन्कवाद जेसे गम्भीर मुद्दे पर बहश के दोरान् दिखाई दिया, पक्ष या बिपक्ष दोनो तरफ के सीर्फ ऍसे कुक्ष नेता मोजूद थे जिन्हे बोलना था, सरकार गिराने या बनाने के समय यहि नेता अस्पतल के बिस्तर शहित आ जाते हे, नेताओ कि ईस सम्बेदन हीनता पर समाचार पत्रो, टी वी चेनलो एवम जागरूक जनता ने भि गमभीरता से नहि लिआ.
पाकिस्तान के साथ कृकेट खेलने, राजनयिक सम्बन्ध रखने, वहा से अम्पायर बुलाने, ब्यापारिक ओर सान्शकृतिक सम्बन्ध रखने के बारे मे अभि तक भारत तय नहि कर पाया हे कि ऊशे करना क्या हे. क्या भारत को ईसके लिए भि अन्तरास्टृय जनमत कि जरुरत पडेगी ? ईतना सब होने के बाद भि पाकिस्तान से रिस्ते के बारे मे सोचना हि भारत के लिए शर्म कि बात हे, बुजुर्गो न कहा हे "बध से भला त्याग" भारत कम से कम पाकिस्तान का बहिस्कार तो तुरन्त कर सकता हे.
Saturday, 13 December 2008
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