Thursday, 9 April 2009
आजादी
आजादी से लेकर आज तक कांग्रेस देश के साथ धोखा करति आ रही है, भारत का कोई भी क्रांतिकारी जिन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया श-शर्त आजादी नही शम्पूर्ण स्वराज्य चाहता था, लेकिन कांग्रेसी दलालों ने न शिर्फ अंग्रेजों से समझोता करके आजादी स्वीकार की बल्कि उनकी बातो में आकर देश के टुकड़े भी कर डाले इनके जुल्मों कि कहानी यहाँ से सुरु होती है भारत को सोने कि चिडिया कहा जाता था हमारे भारत को मुगलों और अंग्रेजों ने दरबरिओं और रायसाहबों के साथ मिलकर खूब लूटा
Monday, 29 December 2008
भारत का कानून
६- भारत का कानून अंग्रेजों द्वारा बनाया गया है, जो वे अपनी सुबिधा के अनुसार दोहरे मापदंड को ध्यान में रखकर, दमनकारी नीतियों को लागु करने के लिए तैयार किया था, अफशोस भारत आज भी उसी कानून तथा कानूनी भाषा कि चक्की में आम जनता को पीस रहा है, आज सम्बिधान पर एक लम्बी बहस करके ब्यापक संसोधन की जरूरत है, देश में हिंदू ब्यक्तिगत कानून, मुस्लिम ब्यक्तिगत कानून तथा प्रादेशिक बिशेशाधिकार कानून खत्म करके एक कानून लाया जाय जो देश के जनसमुदाय हित में न होकर देश के जनहित में हो
७-
Saturday, 27 December 2008
"आम आदमि ओर भारत का लक्क्ष्य"
"इन्डिया" २०१४ तक हिन्दू राश्ट्र "भारत" घोशित हो जायेगा, तथा २०२० तक दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बन कर रहेगा. ओर इसका श्रेय देश कि आम जनता को जायेगा जो शायद अब आगे आने को उत्शुक हे. हमरी ओर आपकि क्या भुमिका होगि यह तय करना आपके हाथ मे हे।
Wednesday, 24 December 2008
"भारत कि कमजोरी"
क्या ४०० साल के मुगलो कि तानासाही ओर बरबर सासन का डर, ओर २०० साल के अन्ग्रेजो कि गुलामी का असर आज भी हम पर हाबी हे ? हमारी गुलामी के लिए कोन जिम्मेदार थे, मुठी भर मुगल, गिनती के गोरे या फिर हम खुद् ? भारत जिस दिन ईस बात पर गम्भीरता से सोचेगा ओर समझ लेगा तभि भारत पूरी तरह से आजद होगा, भारत कि सबसे बडि कमजोरी उसके दो बिचार रहे हे "अहिसा परमोधर्म" ओर "अतिथी देवोभव" ओर गुलामि के कारण भि, आज भि भारत बिकसित देश बनने का सपना तो देखता हे पर अपनि सोच पर सोचने के लिए तेयार नहि हे, आज भि भारत उस हॉथी कि तरह हे जिसे अपनि ही ताकत का पता नहि हे, वर्ना खरगोश पकणने के लिए मचान नहि बाधता, भारत सेर हे परन्तु हॉथी जेसा आचरण करता हे।
Friday, 19 December 2008
"भारत का इतिहास ओर आतन्कवाद"
१९४७ मे अग्रेजो ने भारत क्षोड्ने से पहले अपना आखिरि दाव खेला, कूटनीतिक वार करके भारत के दो टुकडे कर दिया, भारत के मुसलमान अपने लिए अलग देश चाहते थे सो भारत का कुक्ष हिस्सा अलग कर बना दिया गया पाकिस्तान बट्वारा हो गया ओर दोनो देश एक दुसरे के दुस्मन बन गये हमेसा के लिए ऍ बात हम आप ओर दुनिया जानति हे, मुसलमन उस हिस्से पर पाकिस्तान बनाये जहा उनकि आवादी ज्यादा थि, ओर उस हिस्से से हिन्दुओ को खत्म कर दिये, लेकिन काश्मीर एक ऍसा हिस्सा था जहा हिन्दू ओर मुसलमन दोनो कि आवादी लगभग बराबर थि, तथा भारत भि काश्मीर को क्षोड्ना नहि चाहता था, लाख जोर लगा कर भि पाकिस्तान ओर मुसल्मान काश्मीर से हिन्दुओ को पुरी तरह से खत्म नहि कर पाए, सो दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान काश्मीर का नाम लेकर, आजादी, जेहाद्, ओर आतन्क्वाद के नाम पर बासठ सालो से घोसित तथा अघोसित युद्ध लड रहा हे, आखिर क्यु ? भारत ने क्या बिगाडा हे पाकिस्तान का ? भारत ने कोन सि भूल कि हे ? ओर पाकिस्तान क्या चाहता हे भारत से ?
उपरोक्त सारे सवालो का जबाब भारत का हर नागरिक जानता हे, १० साल से उपर के बच्चे से मरणासन्न बुढे तक, किसानो से सेना के जवानो तक, मजदूरो से ब्यापारियो तक, अभिनेताओ से नेताओ तक, गवारो से बुद्धजीवियो तक, कोइ भि इसका कारण बता देगा, साथ मे समाधान भि बता देगा, मेरा दावा हे लोकतन्त्र के चारो स्तम्भो से खाश कर नेताओ ओर सूचना तन्त्रो से सिर्फ सच बोले ओर सच का साथ दे तो सभि सम्स्याए ख्त्म हो जायेगि, क्यो कि देश ओर देश के आम आदमी तथा उसकि सम्स्याओ से युद्ध के बीच लोकतन्त्र के चारो स्तम्भ शिखन्डी कि भुमिका मे खडा हे.
उपरोक्त सारे सवालो का जबाब भारत का हर नागरिक जानता हे, १० साल से उपर के बच्चे से मरणासन्न बुढे तक, किसानो से सेना के जवानो तक, मजदूरो से ब्यापारियो तक, अभिनेताओ से नेताओ तक, गवारो से बुद्धजीवियो तक, कोइ भि इसका कारण बता देगा, साथ मे समाधान भि बता देगा, मेरा दावा हे लोकतन्त्र के चारो स्तम्भो से खाश कर नेताओ ओर सूचना तन्त्रो से सिर्फ सच बोले ओर सच का साथ दे तो सभि सम्स्याए ख्त्म हो जायेगि, क्यो कि देश ओर देश के आम आदमी तथा उसकि सम्स्याओ से युद्ध के बीच लोकतन्त्र के चारो स्तम्भ शिखन्डी कि भुमिका मे खडा हे.
Saturday, 13 December 2008
"सम्बेदन हीन ओर बेशर्म भारत"
भारतीय नेताओ कि सम्बेदन हीनता का ऊदाहरण कल भारतीय सन्सद के अन्दर आतन्कवाद जेसे गम्भीर मुद्दे पर बहश के दोरान् दिखाई दिया, पक्ष या बिपक्ष दोनो तरफ के सीर्फ ऍसे कुक्ष नेता मोजूद थे जिन्हे बोलना था, सरकार गिराने या बनाने के समय यहि नेता अस्पतल के बिस्तर शहित आ जाते हे, नेताओ कि ईस सम्बेदन हीनता पर समाचार पत्रो, टी वी चेनलो एवम जागरूक जनता ने भि गमभीरता से नहि लिआ.
पाकिस्तान के साथ कृकेट खेलने, राजनयिक सम्बन्ध रखने, वहा से अम्पायर बुलाने, ब्यापारिक ओर सान्शकृतिक सम्बन्ध रखने के बारे मे अभि तक भारत तय नहि कर पाया हे कि ऊशे करना क्या हे. क्या भारत को ईसके लिए भि अन्तरास्टृय जनमत कि जरुरत पडेगी ? ईतना सब होने के बाद भि पाकिस्तान से रिस्ते के बारे मे सोचना हि भारत के लिए शर्म कि बात हे, बुजुर्गो न कहा हे "बध से भला त्याग" भारत कम से कम पाकिस्तान का बहिस्कार तो तुरन्त कर सकता हे.
पाकिस्तान के साथ कृकेट खेलने, राजनयिक सम्बन्ध रखने, वहा से अम्पायर बुलाने, ब्यापारिक ओर सान्शकृतिक सम्बन्ध रखने के बारे मे अभि तक भारत तय नहि कर पाया हे कि ऊशे करना क्या हे. क्या भारत को ईसके लिए भि अन्तरास्टृय जनमत कि जरुरत पडेगी ? ईतना सब होने के बाद भि पाकिस्तान से रिस्ते के बारे मे सोचना हि भारत के लिए शर्म कि बात हे, बुजुर्गो न कहा हे "बध से भला त्याग" भारत कम से कम पाकिस्तान का बहिस्कार तो तुरन्त कर सकता हे.
Friday, 12 December 2008
पाकिस्तान द्वारा आतन्कियो पर कार्यवाही हसी न आनेवाले एक भद्दे मजाक से ज्यादा कुक्ष नहि हे, यदि अमेरिका के केहने पर पाकिस्तान चलता तो ओसामा बिन लादिन कब का फाशी चड चुका होता, यदि पाकिस्तान चाहता तो दुनिया मे आतन्कवाद होता हि नहि, अमेरिका ने आतन्कवाद रुपी जिस जिन्न को पेदा किया हे उसी के खोफ से पाकिस्तान को गोद मे बिठा रखा हे, अमेरिका कि मजबूरी को भारत को सनझना चाहिए……
१-भारत पकिस्तान से दोस्ती कर्ने व निभाने के बारे मे हमेशा के लिए त्याग दे॑. क्यो कि ए हो नही सकता… ४०० साल का ईतिहास गवाह हे॑.
२-ब्यवहारिक व ब्यपारिक हर तरह का सम्बन्ध हमेशा के लिए खत्म कर दे. क्यो कि ए चल नही सकता…. १९४७ से आज तक बस, अब ओर नही.
३-भारत का पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिक्रित काशमीर पर हमला भारत के बिकास हित मे नही होगा. क्यो कि पाकिस्तान के पास खोने के लिए कुक्ष भी नही हे…. भारत का २०२० तक शर्वोपरि होने का सपना जरुर टूटेगा.
४-भारत अपनि सीमाऍ पुरी तरह से सील करके हर नागरिक को अपना परिचय पत्र बनवाने का आदेश दे. क्यो कि एक करोड से ज्यादा लोग यहॉ अनाधिकृत रुप से रह रहे हे, जो आतन्कवादी हे, या हो सकते हे….. समक्षोत “एक्स्प्रेस” ओर भाइ चारा “बस्” शहीदो ओर बेकसुर लोगो कि लासो पर कब तक चलेगी.
५-भारत का पाकिस्तान से २० आतन्कवादियो कि मॉग भी गलत ओर गेर जरुरी हे. क्यो कि भारत उसे सजा तो दे नही सकता, आम अपराधी ओर आतन्कवादी मे फर्क् नही जान्ता, कल वो भी सान्सद ओर फिर मन्त्री बन जाएगा या एक ओर कन्ध्हार…. “भारत को टाडा ओर पोटा से भी कठोर कानून कि जरुरत हे, देस का हर नागरिक ईसके लिए तॅयार हे कुक्ष रायसाहबो ओर दरबारियो के बन्सजो को झोड कर.
क्या ४०० साल के मुगलो कि तानासाही बरबर सासन का डर, ओर २०० साल के अन्ग्रेजो कि गुलामी का असर आज भी हम पर हाबी हे ? हमारी गुलामी के लिए कोन जिम्मेदार थे, मुठी भर मुगल, गिनती के गोरे या फिर हम खुद् ? भारत जिस दिन ईस बात को गम्भीरता से सोचेगा ओर समझ लेगा…… आज भि भारत उस हॉथी कि तरह हे जिसे अपनि ही ताकत का पता नहि हे वर्ना…..खरगोश पकणने के लिए मचान नहि बाधता.
१-भारत पकिस्तान से दोस्ती कर्ने व निभाने के बारे मे हमेशा के लिए त्याग दे॑. क्यो कि ए हो नही सकता… ४०० साल का ईतिहास गवाह हे॑.
२-ब्यवहारिक व ब्यपारिक हर तरह का सम्बन्ध हमेशा के लिए खत्म कर दे. क्यो कि ए चल नही सकता…. १९४७ से आज तक बस, अब ओर नही.
३-भारत का पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिक्रित काशमीर पर हमला भारत के बिकास हित मे नही होगा. क्यो कि पाकिस्तान के पास खोने के लिए कुक्ष भी नही हे…. भारत का २०२० तक शर्वोपरि होने का सपना जरुर टूटेगा.
४-भारत अपनि सीमाऍ पुरी तरह से सील करके हर नागरिक को अपना परिचय पत्र बनवाने का आदेश दे. क्यो कि एक करोड से ज्यादा लोग यहॉ अनाधिकृत रुप से रह रहे हे, जो आतन्कवादी हे, या हो सकते हे….. समक्षोत “एक्स्प्रेस” ओर भाइ चारा “बस्” शहीदो ओर बेकसुर लोगो कि लासो पर कब तक चलेगी.
५-भारत का पाकिस्तान से २० आतन्कवादियो कि मॉग भी गलत ओर गेर जरुरी हे. क्यो कि भारत उसे सजा तो दे नही सकता, आम अपराधी ओर आतन्कवादी मे फर्क् नही जान्ता, कल वो भी सान्सद ओर फिर मन्त्री बन जाएगा या एक ओर कन्ध्हार…. “भारत को टाडा ओर पोटा से भी कठोर कानून कि जरुरत हे, देस का हर नागरिक ईसके लिए तॅयार हे कुक्ष रायसाहबो ओर दरबारियो के बन्सजो को झोड कर.
क्या ४०० साल के मुगलो कि तानासाही बरबर सासन का डर, ओर २०० साल के अन्ग्रेजो कि गुलामी का असर आज भी हम पर हाबी हे ? हमारी गुलामी के लिए कोन जिम्मेदार थे, मुठी भर मुगल, गिनती के गोरे या फिर हम खुद् ? भारत जिस दिन ईस बात को गम्भीरता से सोचेगा ओर समझ लेगा…… आज भि भारत उस हॉथी कि तरह हे जिसे अपनि ही ताकत का पता नहि हे वर्ना…..खरगोश पकणने के लिए मचान नहि बाधता.
Subscribe to:
Comments (Atom)

